अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:दिल्ली की वित्त मंत्री आतिशी ने मंगलवार को जीएसटी काउंसिल की 50वीं बैठक में जीएसटी को ईडी के तहत लाने पर पुरजोर तरीके से विरोध जताया। केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से इस बाबत चर्चा की मांग की। इस मुद्दे पर दिल्ली की वित्त मंत्री की केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से तीखी बहस भी हुई। दिल्ली और पंजाब सहित कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने भी केंद्र सरकार के इस कदम का जीएसटी काउंसिल में विरोध किया| इस बाबत साझा करते हुए वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, जीएसटी को ईडी और पीएमएलए के तहत लाकर केंद्र का मंसूबा व्यापारियों को परेशान करना है। ये व्यापारियों को परेशान कर उनके व्यापार को तबाह करने के लिए भाजपा का सीधा हमला है। केंद्र के इस आदेश से ईडी छोटे दुकानदार से बड़े कारोबारी जो जीएसटी भरते है उनपर पीएमएलए लगा देगी, व्यापारियों को बेल नहीं मिलेगा, इससे कोई व्यापार नहीं कर पायेगा और अर्थव्यवस्था डूब जाएगी।
उन्होंने कहा कि, भारत जैसे विकाशील देश को आगे बढ़ाना है तो व्यापारियों पर गलत शिकंजा कसने के बजाय उनके लिए व्यापार आसान करने की जरुरत है, तभी देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, अब तक केंद्र ने विपक्षी दलों पर ईडी का गलत इस्तेमाल किया और अब अपने नए आदेश से व्यापारियों को खास तौर पर विपक्षी राज्यों में व्यापारियों को परेशान करेगी। लेकिन व्यापारियों की बेहतरी के लिए हम ईडी को असीमित ताकत देने के केंद्र की कोशिशों का विरोध करेंगे, और इसे रोकने का हर संभव प्रयास करेंगे। इस बाबत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि, व्यापारियों का एक बहुत बड़ा हिस्सा जीएसटी नहीं देता – कुछ मजबूरी में, कुछ जानबूझकर। केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले जीएसटी को भी ईडी में शामिल कर दिया। यानी अब अगर कोई व्यापारी जीएसटी नहीं देता तो ईडी उसे सीधे गिरफ्तार करेगी और बेल भी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी प्रणाली इतनी जटिल है कि जो लोग पूरा जीएसटी भी दे रहे हैं, उन्हें भी किसी प्रावधान में फंसा कर जेल में डाला जा सकता है। यानी देश के किसी भी व्यापारी को केंद्र सरकार जब चाहे जेल भेज देगी। ये बेहद खतरनाक है। व्यापारी व्यापार करने की बजाय अपने को बस ईडी से बचाता फिरेगा। देश के छोटे छोटे व्यापारी भी इसकी चपेट में आ जाएँगे। कोई व्यापारी नहीं बचेगा। ये देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने आगे लिखा कि, ‘आज जीएसटी काउंसिल की मीटिंग है। मैं उम्मीद करता हूँ, सब लोग इसके ख़िलाफ़ बोलेंगे। केंद्र सरकार इसे तुरंत वापिस ले। हम इसका कड़ा विरोध करते है और देश के व्यापारियों के साथ है। केंद्र सरकार द्वारा 7 जुलाई को निकाले गए गजट जिसमें जीएसटी को भी ईडी के तहत लाने की बात कही गई है। इस मुद्दे पर दिल्ली की राजस्व मंत्री आतिशी ने कहा कि, जो लोग जीएसटी भरते है चाहे उनका छोटा कारोबार हो या बड़ा बिज़नेस अब, इस नोटिफिकेशन के बाद पीएमएलए के तहत ईडी उनपर कारवाई कर सकती है। इससे साफ़ है कि जिस तरह केंद्र सरकार ईडी का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने के लिए, उनके गिरफ्तार करने के लिए करती है, लोगों को बेल नहीं मिल पाती। तो क्या अब इस फैसले से देश के करोड़ों व्यापारी जो जीएसटी भरते है उनपर ईडी के केस चलेंगे? तो क्या अब व्यापारी वर्ग अपने व्यापार को बढ़ाने पर ध्यान देंगे या फिर ईडी के केसों से जूझते फिरेंगे? हम इसका पुरजोर विरोध करते है और बहुत से राज्यों के राजस्व मंत्री ने इसका विरोध किया है। करोड़ो व्यापारियों की जिन्दगी और देश की अर्थव्यवस्था इससे जुडी हुई है। दिल्ली की वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि केंद्र के इस नोटिफिकेशन से साफ़ है कि, इस देश में 1 करोड़ 38 लाख लोग जो जीएसटी देते है उनके ऊपर कभी भी ईडी कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले समय में ईडी जब चाहेगी तो गली-मुहल्ले में जाकर किसी भी व्यापारी और बिज़नेसमैन पर पीएमएलए के तहत केस दर्ज कर के उसे जेल में डाल देगी और उसे बेल भी नहीं मिलेगा। ऐसे में अगर हमें भारत जैसे विकाशील देश को आगे बढ़ाना है तो व्यापारियों पर शिकंजा कसने के बजाए उनके लिए बिज़नेस आसान करना होगा तभी हमारे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर बिज़नेस को पीएमएलए में लाया जाएगा और ईडी के शिकंजे इस देश के व्यापारियों के ऊपर कसने शुरू हो जाएंगे तो इस देश में कोई भी व्यापारी बिज़नेस नही कर पाएगा , सारे बिज़नेस ठप हो जाएंगे और इस देश की इकॉनमी ठप हो जाएगी।
वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, हम सबने देखा है कि केंद्र सरकार द्वारा ईडी का कैसा दुरुपयोग लोगों को परेशान करने के लिए, उन्हें गिरफ्तार करने के लिए और महीनों तक बेल ना देने के लिए किया जा रहा है। ऐसे में क्या अब केंद्र आने वाले दिनों में देश के करोड़ों व्यापारियों के ऊपर ईडी के केस चलाएगी? अब आने वाले दिनों में व्यापारी अपने व्यापार और देश के अर्थव्यवस्था को बढ़ाएंगे या ईडी के केस से खुद को बचाएंगे।वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, दिल्ली और पंजाब सहित कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र सरकार के इस कदम का जीएसटी काउंसिल में विरोध जाता रहे है| जीएसटी को ईडी और पीएमएलए के तहत लाकर केंद्र का मंसूबा व्यापारियों को परेशान करना है। ये व्यापारियों को परेशान कर उनके व्यापार को तबाह करने के लिए भाजपा का सीधा हमला है। केंद्र ने अबतक विपक्षी दलों पर ईडी का गलत इस्तेमाल किया और अब अपने नए आदेश से व्यापारियों को परेशान करने वाली है। लेकिन हम व्यापारियों के हित में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठा रहे है और हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि इस नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लिया जाए।
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