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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, तो हम पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा देंगे और घटेंगी, तो हम मौन व्रत धारण कर लेंगे-कांग्रेस

अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
कांग्रेस प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आदरणीय साथियों, आप सभी को सादर नमस्कार! साथियों, पेट्रोल और डीजल की जो कीमतें हैं, उसकी एक डायनेमिक प्राइसिंग होती है अर्थात उसकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करती है, पर मोदी जी की डायनेमिक प्राइसिंग क्या है, वो यह है कि चित्त मैं जीता, पट तुम हारे। मतलब अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, तो हम पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा देंगे और यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटेंगी, तो हम मौन व्रत धारण कर लेंगे।एक बहुत महत्वपूर्ण आंकड़े लेकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूं कि अभी दिवाली से एक दिन पूर्व पेट्रोल पर 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी केन्द्र सरकार ने कम की थी, पर उस दिन से लेकर आज तक कच्चे तेल की कीमतें देश में पेट्रोल में 8 रुपए प्रति लीटर कम हो गई, पर सरकार ने कीमतें कम नहीं की। 5 रुपए प्रति लीटर की कमी का पेट्रोल में झुनझुना थमा कर देशवासियों को कच्चे तेल के दामों में हुई 8 रुपए प्रति लीटर की कमी से मोदी सरकार ने वंचित कर दिया।

साथियों, एक आंकड़ा और मैंने कैलकुलेट किया, उसके बारे में भी विस्तार से आपको बताऊंगा कि अगर पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी को 2014 के स्तर पर ला दिया जाए और कच्चे तेल की कीमतों में जो घटत हुई है, उसका लाभ देशवासियों को दिया जाए, तो डीजल में 25 रुपए 24 पैसे प्रति लीटर और पेट्रोल में 26 रुपए42 पैसे प्रति लीटर की कमी की जा सकती है। अब साथियों, विस्तार से इसके बारे में आज की प्रेस वार्ता में मैं चर्चा करुंगा, पर Dynamic pricing in essence = Head- I win, tails- you lose, मतलब लूटने का काम सिर्फ सरकार का रहेगा, जब कमी होगी, तो उसका लाभ देशवासियों को नहीं मिलेगा। एक तरफ तो सारी आवश्यक वस्तुओं के दामदिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। भले ही वो कपडे हों, जूते हों, खाने का तेल हो, गैस सिलेंडर हो,भले ही वो सब्जियों के दाम हो, भले ही वो चायपत्ती हो, भले ही वो राजमा हो, भले ही वो दलहन हो, पिछले सात सालों में कैसे इन चीजों के दाम बढ़े। दूसरी तरफ, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने एक आंकड़ा दिया कि दिसंबर, 2021 अर्थात् पिछले माह में देश की बेरोजगारी की दर 7.9 प्रतिशत थी और जो शहरी बेरोजगारी की दर है, वो 9 प्रतिशत से भी ज्यादा थी, 9.3 प्रतिशत। मतलब देश की बेरोजगारी दर 7.9, शहरी बेरोजगारी दर 9.3 प्रतिशत। ध्यान रहे ये दर 2 प्रतिशत थी 2012-13 में, जब यूपीए की सरकार थी। जो आज बढ़कर 9.3 प्रतिशत अर्बन अनएम्प्लोयमेंट और टोटल अनएम्प्लोय मेंट लेवल हो गया है 7.3 प्रतिशत। जब महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है, उस दौरान अगर कच्चे तेल की कीमत का लाभ अगर सरकार देशवासियों को नहीं देती है, तो मैं कहूंगा ये एक तरह से देश के लोगों के साथ धोखा है। एक तरह से क्राईम है, इकोनॉमिक क्राईम है, क्योंकि लोगों के पास पैसा नहीं है, महंगाई के कारण बेरोजगारी की दर बढ़ती जा रही है और उस समय आप तेल के, पेट्रोल और डीजल में जो कमी हुई है अंतरराष्ट्रीय बाजार में, उसका बेनिफिट देशवासियों को नहीं दे रहे हैं। मैं एक आंकड़ा आपके सामने प्रस्तुत करता हूं। जुलाई 2021 से लेकर दिसंबर, 2021 का कच्चे तेल का जो भारत सरकार कच्चा तेल खरीदती है, मेरा या आपका नहीं है। जुलाई में क्रूड के दाम थे 73.54 डॉलर प्रति बैरल। अक्टूबर में क्रूड के दाम हो गए 82.11 डॉलर प्रति बैरल और दिसंबर में क्रूड के दाम हो गए 73.3 डॉलर प्रति बैरल अर्थात दिसंबर में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई के स्तर पर आ गई। पर अगर हम उसी स्तर पर तेल की कीमतों को निर्धारित करें, तो 8 रुपए प्रति लीटर तो कमी हो जाती है पेट्रोल में और 7 रुपए प्रति लीटर कमी हो जाती है डीजल में और इस कमी को नहीं करने का क्या कारण है, वो बड़ा रोचक है कि जो सरकारी तेल कंपनियां हैं, भले ही वो आईओसीएल हो,बीपीसीएल हो, एचपीसीएल हो, अगर हम उनके सितंबर, 2021 की तुलना सितंबर, 2019, अर्थात प्री-कोविड लेवल पर प्रॉफिट की तुलना करें, तो आईओसीएल का प्रॉफिट 2019 प्रतिशत बढ़ा है, अर्थात अगर वहाँ पर तेल कीमतें कम कर देंगे देशवासियों के लिए तो इन तेल की कंपनियों का प्रॉफिट घट जाएगा, तो सरकार को लाभांश नहीं मिलेगा, तो अर्थात् 5 रुपए का आपको झुनझुना मिले और पीछे से 8 रुपए प्रति लीटर का जो बेनेफिट आपको और हमें मिलना चाहिए था, वो सरकार ने रोक दिया। वो बेनेफिट तेल कंपनियों को दे दिया और उन तेल कंपनियों से लाभांश ले रही है सरकार। Before tax जो प्रॉफिट है, सितंबर, 2019 का, in comparison to September 2021, वो आईओसीएल का बढ़ा है 2019 प्रतिशत ! बीपीसीएल का बढ़ा है 141.2 प्रतिशत और एचपीसीएल का बढ़ा है 59.1 प्रतिशत। मैं आंकड़ा देना चाहता हूं, आईओसीएल का जहां सितंबर, 2019 में प्रॉफिट था 395 करोड़, जो सितंबर 2021 में हो गया 8,370 करोड़। बीपीसीएल का जो सितंबर, 2019 में प्रॉफिट था 1,491 करोड़, जो सितंबर, 2021 में हो गया 3,596 करोड़। एचपीसीएल का जो प्रॉफिट था सितंबर 2019 में 1,484 करोड़, जो सितंबर, 2021 में हो गया 2,361 करोड़। अर्थात जो कच्चे तेल की कीमतों की जो कमी का जो बेनेफिट जो आम देशवासियों को मिलना चाहिए था, वो इन कंपनियों को मिल गया और इन कंपनियों के द्वारा वो पैसा जा रहा है वापस सरकार को। मतलब आपने जो 5 रुपए पर लीटर का झुनझुना दिया था दिवाली से एक दिन पूर्व, उसको दे के आपने देशवासियों को 8 रुपए प्रति लीटर जो कमी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल की कीमतों की हुई, उससे वंचित कर दिया। डीजल में 7 रुपए प्रति लीटर की कमी से देशवासियों को वंचित कर दिया। तीसरा मुद्दा, अगर हम तुलना करें एक्साइज ड्यूटी की जो आज केन्द्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर

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